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ईसाई जोक

 ईसाई पैगम्बरों का चरित्र :-  1- “इंसान को आदमी के पाखाने से रोटी पका कर खाने की आज्ञा देता है|”   (बाईबिल -जेह्केल पर्व ४) 2- “बाप को अपनी बेटी से व्यभिचार व शादी करने की आज्ञा देता है तथा उसे अच्छा काम बताता है|  (बाईबिल -करन्थियो ३६-३७-३८)” 3 -“यहोवा परमेश्वर औरतो को नंगा करता है| (बाईबिल -याशाशाह३/१६-१७)” 4- "यहूदा ने अपने बेटे की बहु से व्यभिचार किया|  (बाईबिल -उत्पत्ति ३८/१२-२०)” 5 -“पैगम्बर लूत ने अपनी खास बेटियों से शराब पी करके उन्हें गर्भवती बनाया| (बाईबिल -उत्पत्ति १९/३३-३८)” 6 -“हजरत अविराहम ने अपनी बहन से व्यभिचार किया व झूठ-मुठ की शादी की|  (बाईबिल -उत्पत्ति १२/११-१३)” 7 -“याकूब ने अपनी दासियों के साथ व्यभिचार किया व उसके बेटी दीन ने हमुर के बेटे सिकम के साथ व्यभिचार किया|  (बाईबिल -उत्पत्ति ३४२४-३०)” 8 -“पैगम्बर दाउद ने उरियाह की खुबसूरत बीवी से व्यभिचार किया,उरियाह को मरवा डाला व उसकी बीवी को अपने घर में डाल लिया|  (बाईबिल -सैमुएल२ पर्व ११/२-२५)” 9 -“दाउद के बेटे आमुनुन ने अपनी सगी बहिन तामार के साथ जबरदस्ती काला मुह (व्यभिचार...

आर्यसमाज की गुदा में साँप

(दयानंद कृत यजुर्वेदभाष्य, भाष्य-१) पूषणं वनिष्ठुनान्धाहीन्स्थूलगुदया सर्पान्गुदाभिर्विह्लुत आन्त्रैरपो वस्तिना वृषणमाण्डाभ्यां वाजिनग्वगं शेपेन प्रजाग्वं रेतसा चाषान् पित्तेन प्रदरान् पायुना कूश्माञ्छकपिण्डैः॥ ~यजुर्वेद {अध्याय २५, मंत्र ७} दयानंद अपने यजुर्वेदभाष्य में इस मंत्र का अर्थ यह लिखते हैं कि--- हे मनुष्यों! तुम मांगने से पुष्टि करने वालों को स्थूल गुदेंद्रियों के साथ वर्तमान, अंधे सर्पों को गुदेंद्रियों के साथ वर्तमान विशेष कुटिल सर्पों को आंतों से, जलों को नाभि के नीचे के भाग से, अंडकोष को आंडों से, घोडे के लिंग और वीर्य से संतान को, पित्त से भोजनों को, पेट के अंगो को गुदेंद्रिय और शक्तियों से शिखावटों को निरंतर लेओं। समीक्षक--  अब कोई इन नियोग समाजीयों से यह पूछे कि उन्हें दयानंद द्वारा किये गये अधिकांश मंत्रो के ऐसे अर्थ अश्लील क्यों नहीं लगते? और जब इस वेद ऋचा की ही भांति इन्हें अन्य सनातनी धर्म ग्रथों मे कोई श्रुति या श्लोक दिख जाता हैं तो अपनी बुद्धि अनुसार ही उसके अर्थ का अनर्थ कर आप्त पुरूषों द्वारा रचित ग्रंथों का अपमान करते है और उल्टा सनातनधर्मियों और उनके शा...

नियोगी दयानद

सनातन धर्म से भिन्न दयानंद द्वारा चलाए गये वेद विरुद्ध मतों में से एक मत है पशुधर्म नाम से विख्यात “नियोग प्रथा” दयानंद ने अपने तथाकथित ग्रंथ “सत्यार्थ प्रकाश” में लगभग पूरा एक समुल्लास इस पशुधर्म नियोग पर ही लिखा है, और वेदादि शास्त्रों के अर्थ का अनर्थ कर अपने अनुयायियों के साथ साथ समस्त भारतवर्ष को इस  महाअधर्म व्यभिचार नियोग नामक अंधकूप में धकेलने का असफल प्रयास किया है, वेद मनुस्मृति आदि के अर्थ का अनर्थ कर नियोग सिद्ध किया है जिससे धर्म के न जानने वाले लोगों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है, सो इस लेख के माध्यम से मैं दयानंद के उन मिथ्या भाष्यों की धज्जियां उडाते हुए, प्रमाण के साथ यह सिद्ध करकें दिखाऊंगा की दयानंद द्वारा चलाया यह पशुधर्म नियोग  वेद विरुद्ध होने से मनुष्यों के लिए निषिद्ध है अर्थात मनुष्यों को यह पशुधर्म त्यागने योग्य है, सो अब एक एक करकें दयानंद के उन सभी वेद विरुद्ध भाष्यों का खंडन करते हैं जिनके अर्थ का अनर्थ कर दयानंद ने नियोग सिद्ध किया है सुनिये-- (दयानंद कृत ॠग्वेदभाष्य, भाष्य-१) सोम: प्रथमो विविदे गन्ध्र्वो विविद  उत्तरः। तृ...

आँख से अँधा दिमाग से पैदल आर्य समाज

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नियोग समाज द्वारा ब्राह्मणों पर एक आरोप अक्सर लगता आया हे वो ये की पुराणों की रचना ब्राह्मणों ने की थी और उसमे मिलावट भी कर दी थी इसलिए वो पुराणों को नहीं मानते..... अरे मूर्ख अल्पज्ञ समाजीयो जरा इस पर भी तो सोच विचार करकें देखो कि ३ युगों तक लगभग करोड़ सालो तक श्री वेद भी तो उन्हीं ब्राह्मणों और पौराणिकों के पास ही रहे हैं तो क्या ब्राह्मणों ने वेदों में परिवर्तन नहीं कर दिए होंगे ? उन्हें कैसे शुद्ध मान लेते हो ?..... ... अगर पुराणों को गलत सिर्फ इसलिए कहते हो की ब्राह्मणों ने अपने स्वार्थ के लिए लिखे तो उन्ही ब्राह्मणों के पास ३ युगो से वेद भी रहे हैं उनको श्री वेदों को एकदम सही कैसे मान रहे हो ?????   अब कोई ये बताए कि क्या कोई दो कौडी का व्यक्ति यह तय करेगा की कौन सा धर्म ग्रन्थ सही हे कौन सा गलत ? नियोग समाज ब्राह्मणों को बदनाम करने के तरीके बंद करें !! जय आदि गुरु शंकराचार्य !!  

दयानंद सनातन धर्म का शत्रु ( Dayanand Sanatan Dharm Ka Shatru )

✴✴  दयानंदभाष्य खंडनम् -३  ✴ ✴ दयानंद ने वेदआदि भाष्यों के साथ छेडछाड क्यों किया इन सबके पिछे स्वामी जी का उद्देश्य क्या था ?? आइए देखते है   सत्यार्थ प्रकाश सप्तम संमुल्लास :- दयानन्द जी लिखते है ।   अग्नेर्वा ऋग्वेदो जायते वायोर्यजुर्वेद: सुर्यात्सामवेद: ।।   स्वामी जी इसका अर्थ लिखते है - "ईश्वर ने सृष्टि की आदि मे अग्नि वायु आदित्य तथा अंगिरा ऋषियो की आत्माओ मे एक एक वेद का प्रकाशन किया" अब आइये जरा इस मंत्र के अर्थ पर भी नजर डाल लेते है अग्नेर्वा - अग्नि द्वारा ऋगवेदो - ऋग्वेद जायते - प्रकट हुआ /दोहन वायोर्यजुर्वेद: - वायु द्वारा यजुर्वेद सुर्यात्सामवेद: - सूर्य के द्वारा सामवेद   अब कोई आर्य समाज के तथाकथित बुद्धिजीवी इस पर प्रकाश डालना चाहेंगे ??? की स्वामी दयानन्द सरस्वती ने यहा पर अंगिरा और अथर्वेद कैसे जोड़ा ???? और इस मंत्र मे अग्नि सूर्य और वायु के लिए ऋषि शब्द का प्रयोग कहाँ हुआ है ???   यहाँ सिद्ध हो जाता है की दयानन्द को ज्ञान तो बिल्कुल भी नही था क्योंकि इस मंत्र को कोई भी जिसमे थोडी सी भी बुद्धि होगी या संस्कृत का मूल अध्धयन भी किया होग...

एक मूर्ख को पूरी दुनिया मूर्ख ही दिखाई पड़ती है ( Maha Dhurt Dayanand )

✴ ✴  दयानंदभाष्य खंडनम् - ४  ✴ ✴ ये देखिए इस धूर्त को सत्यार्थ प्रकाश के अपने एकादश समुल्लास में ये बोलता है कि नानक जी को ज्ञान नहीं था अब ज्ञान था या नहीं था मैं इस चक्कर में नहीं पडना चाहता। परन्तु दुसरो का अपमान करने वाला , दुसरो को मुर्ख समझने वाला स्वयं कितना ज्ञानी है यह जानना जरूरी हो जाता है ...   आइए देखते है स्वामी जी कितने समझदार मतलब ज्ञानी थे उन्हीं के शब्दों में पढ़िए   अ) सत्यार्थ प्रकाश के नवम समुल्लास में स्वामी जी कहते हैं कि आसमान का जो ये नीला रंग है वो आसमान में उपस्थित पानी की वजह से है जो वर्षता है सो वो नीला दिखता है    वो बात अलग है कि स्वामी जी की बुद्धि यही तक काम करती थी उन्होंने ये भी नहीं सोचा कि अगर पानी की वजह से आसमान नीला दिखाता है तो फिर बादलों में तो लबालब पानी भरा होता है फिर वो काले सफेद क्यों होते हैं वो बात अलग है कि स्वामी जी को ये भी नहीं मालूम था कि पानी स्वयं रंगहीन हैं वो दुसरे के रंग में क्या परिवर्तन करेगा वो बात अलग है कि स्वामी जी को यह भी नहीं पता था कि आसमान का नीला रंग सूर्य से आने वाली प्रकाश का पृथ्वी के...

सत्यार्थ प्रकाश के लेखक दयानंद चले डॉक्टर बनने

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सत्यार्थ प्रकाश के लेखक दयानंद चले डॉक्टर बनने । स्वामी जी कहने को तो ब्रह्मचारी थे पर थे बड़े रंगीले टाइप के औरतों से मजें लेने का एक मौका नहीं चूकते कभी योनिसंकोचन के नाम पर बेचारी मासूम औरतों का चुतिया काटते तो कभी स्तन के छिद्र पर औषधि लेप कैसे करें घंटा नही बताया और बताते भी कैसे जब स्वयं ही नहीं जानते थे की क्या अंड संड बके जा रहा है और गर्भाधान की तो बात ही क्या कहना उसे पढकर तो अंतर्रासवासन लिखने वाले भी डूब मरे । खेर ये सब बातें बाद की है पहले प्रश्न पर आते हैं ___________________________________ सत्यार्थ प्रकाश द्वितिय सम्मुलास : प्रसूता स्त्री बच्चे को दूध न पिलावे। दूध रोकने के लिये स्तन के छिद्र पर उस ओषधी का लेप करे जिससे दूध स्रवित न हो। ऐसे करने से दूसरे महीने में पुनरपि युवती हो जाती है। ___________________________________ समीक्षा : वाह रे कलयुगी स्वामी वाह औरतों के फिगर का बड़ा ख्याल है आपको , औरत का फिगर खराब नहीं हो, चाहे बच्चा भाड में जाए । नवजात शिशु के लिए माँ का दूध कितना जरूरी है ये वही समझ सकता है जिसकी माँ ने...