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आर्य समाज

एक थे पंडित मनसाराम। आर्यसमाजी थे। आर्यसमाज इन्हें एक महान विभूति और बहुत बड़ा विद्वान मानता है, इन्हें "वैदिक तोप" कहता है। अपनी एक पुस्तक में इन्होंने जो लिखा है, उसे पढ़िए - "महादेवजी जो सर्वथा नग्न होकर और लिंग को हाथ में पकड़कर दारुवन में ऋषियों की स्त्रियों में धावा जा बोले और जिस सांड (शिव) के लिंग को शक्तिशाली और उपयोगी समझकर आज तक भी निर्बल और नपुंसक सनातनधर्मी (हिन्दू) स्त्रियाँ अपनी कामाग्नि को ठंडा करती हैं और कई तो संतान की इच्छा से अपनी योनि को उस पर रगड़कर अपना काम चलाती हैं।" (मनसाराम) अब यह विचार करें - क्या किसी मुसलमान को भी आपने आज तक ऐसे घृणित झूठे आक्षेप लगाते देखा है? यदि दिखा भी हो, तो समझ जाइए कि उसे ऐसा सिखाने वाले भी ऐसे आर्यसमाजी ही होते हैं। हिन्दू महिलाएँ शिवलिंग की पूजा करती तो देखी जाती हैं, किन्तु क्या कोई हिन्दू महिला शिवलिंग के साथ ऐसा अनाचार करती है? मनसाराम ने अपनी पुस्तक में सैकड़ों ऐसी घृणित बातें और झूठ लिखे हैं। इसलिए ये आर्यसमाजियों के बड़े पूज्य हैं। इस कथा को गलत तरह से प्रस्तुत करके आज यही आक्षेप हमारी एक पोस्ट पर - ...